ऑल इंडिया रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म वर्कर्स यूनियन सीटू के महासचिव राज कुमार झा ने कहा है कि खगौल स्थित रेल नीर प्लांट का 2004 में पूर्व रेल मंत्री एवं वर्तमान में मुख्यमंत्री बिहार के द्वारा उद्घाटन किया गया था. इसकी स्थापना के बाद स्थानीय नौजवानों को इस प्लांट में काम मिला था. रेल नीर प्लांट के बंद होने के पूर्व यहां पर लगभग 150 मजदूर कार्यरत थे. उनसे जुड़े उनके परिवार के 800 से ऊपर लोगों के अलावा दैनिक उपयोग में काम आने वाली वस्तुओं के बिक्री से जुड़े लोगों के सामने भी भुखमरी का जाल बिछ गया है.
8 जुलाई 2020 को बिना किसी सूचना के इस प्लांट को बंद कर दिया गया. अब लगता है कि रेल नीर प्लांट को भी बेचने की तैयारी भारत सरकार कर रही है. उन्होंने मांग की कि रेल नीर प्लांट का उत्पादन शीघ्र शुरू किया जाए. रेलवे के निजीकरण पर रोक लगाई जाए. श्रम कानूनों में बदलाव को वापस लिया जाए. इन मांगों को लेकर यूनियन द्वारा आयोजित दो दिवसीय धरना आज शत प्रतिशत सफल रहा. धरना की अध्यक्षता रूपेश कुमार ने किया. धरना को संबोधित करते हुए राज कुमार झा ने कहा कि गुजरा हुआ जमाना फिर वापस नहीं आता है. लेकिन एकता और संघर्ष के बल पर प्लांट को बिकने नहीं होने दिया जाएगा और इसमें पहले से जुड़े सभी मजदूर काम करेंगे.

26 मार्च को आई आर सी टी सी के समक्ष इसको लेकर प्रदर्शन आयोजित होगा. सभा में प्रस्ताव के माध्यम से बिहार विधानसभा में सीपीआईएम के विधायक डॉ सत्येंद्र कुमार सहित अन्य विरोधी दल के विधायकों के साथ मारपीट की घटना की निंदा की गई. जब जन प्रतिनिधि पुलिस के दमनात्मक कार्यवाही से सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता एवं मजदूरों की क्या सुरक्षा होगी. सभा को दिनेश कुमार गुप्ता, कृष्णा प्रसाद ने भी संबोधित किया. धरना कार्यक्रम के दौरान वहां पर कार्यरत सभी मजदूर मौजूद थे.
जानकारी के लिए बता दें कि 8 जुलाई 2020 को बिना किसी सूचना के इस प्लांट को बंद कर दिया गया. रेलवे के निजीकरण पर रोक लगाई जाए. श्रम कानूनों में बदलाव को वापस लिया जाए.
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