सरकार जनता का भगवान हैं और सरकार किसी के साथ कुछ भी करेगा कोई कुछ नहीं करेगा, जो बोलेगा उसे प्रतिनिधियों की तरह लात-घुसे खाना पड़ेगा, देश में तो वही हो रहा है


 सरकार जनता का भगवान हैं और सरकार किसी के साथ कुछ भी करेगा कोई कुछ नहीं करेगा, जो बोलेगा उसे प्रतिनिधियों की तरह लात-घुसे खाना पड़ेगा, देश में तो वही हो रहा है

बिहार विधान सभा (Bihar Assembly) में मंगलवार (23 मार्च) को पुलिस ने सदन के अंदर प्रवेश कर विपक्ष के विधायकों की जमकर पिटाई की. बिहार विधान सभा (Bihar Assembly) में पहली बार राज्य के संसदीय इतिहास में विधानसभा के अंदर पुलिस बुलानी पड़ी. विधान सभा से बाहर घसीटकर ले जा रहे एक विधायक को एक पुलिस अधिकारी ने पीछे से आकर लात भी मारी.

बिहार विधान सभा (Bihar Assembly) में मंगलवार को जो हुआ वह ना सिर्फ दुःखद था बल्कि राज्य के संसदीय इतिहास के ऊपर एक काला धब्बा भी है. सूत्रों से मिली सुचना के अनुसार, विधान सभा अध्यक्ष विजय सिन्हा (Vijay Sinha) ने पुलिस या RAF के जवानों को बुलाया. अपने हर फ़ैसले और ख़ासकर इस फ़ैसले को मुख्य मंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से पूछकर लिया था. जबकि विपक्ष की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आख़िरकार विधान सभा अध्यक्ष को बंधक बनाने की क्या ज़रूरत थी? सदन के अंदर उप मुख्य मंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tarkishore Prasad) हों या अध्यक्ष की कुर्सी पर पर बैठ कर सदन चला रहे प्रेम कुमार (Prem Kumar) हों, के हाथ से काग़ज़ात छीनकर जिस तरीके से राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दल के लोग फाड़ रहे थे उससे किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई थी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) जिन्होंने पूरी शर्मनाक घटना के बाद इस विधेयक को पारित कराने के समय अपने भाषण में माना कि इस विधेयक के बारे में जो भ्रम फैला वो शायद उनके अधिकारियों ने ब्रीफ़िंग किया होता तो ये नौबत नहीं आती.

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजय शंकर दूबे (Vijay Shankar Dubey) ने कहा कि “सदन में गतिरोध ख़त्म करने का ज़िम्मा सरकार और मुख्य मंत्री के ऊपर होता है”. उन्होंने कहा कि “विपक्ष के सदस्य तो अध्यक्ष की कुर्सी तक पर बैठ चुके हैं. ख़ुद नीतीश कुमार के आदर्श कर्पूरी ठाकुर ने दो दिन, दो रात तक धरना दिया था लेकिन उस समय के अध्यक्ष ने पुलिस बुलाकर उन्हें हटाने की गलती नहीं की थी”.

सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक भी मानते हैं कि पुलिस को बुलाकर उन्होंने एक ऐसी ग़लत परंपरा की शुरुआत कर दी है जिसका ख़ामियाज़ा आज नहीं तो कल सता में आज बैठे लोगों को भी भविष्य में विपक्ष में जाने पर उठाना पड़ सकता है.

शिवानंद तिवारी का कहना है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अब निरंकुश होते जा रहे हैं जिसका यह जीता जागता उदाहरण है कि पुलिस की मदद से उन्होंने सदन में विधेयक पारित कराया है. तिवारी के अनुसार नीतीश जनता से रिजेक्टेड एक ऐसे मुख्य मंत्री हैं जो इस बात को पचा नहीं पा रहे कि तेजस्वी अपने बूते उससे कहीं अधिक सीट ले आए हैं और वो ख़ुद नरेंद्र मोदी का साथ होने के बावजूद नम्बर तीन की पार्टी पर सिमट गए.

जानकारी के लिए बता दें कि बिहार विधान सभा (Bihar Assembly) में मंगलवार (23 मार्च) को पुलिस ने सदन के अंदर प्रवेश कर विपक्ष के विधायकों की जमकर पिटाई किया. विधान सभा से बाहर घसीटकर ले जा रहे एक विधायक को एक पुलिस अधिकारी ने पीछे से आकर लात भी मारी.

सरकार जनता का भगवान हैं और सरकार किसी के साथ कुछ भी करेगा कोई कुछ नहीं करेगा, जो बोलेगा उसे प्रतिनिधियों की तरह लात-घुसे खाना पड़ेगा, देश में तो वही हो रहा है सरकार जनता का भगवान हैं और सरकार किसी के साथ कुछ भी करेगा कोई कुछ नहीं करेगा, जो बोलेगा उसे प्रतिनिधियों की तरह लात-घुसे खाना पड़ेगा, देश में तो वही हो रहा है Reviewed by NEWS IBC on मार्च 26, 2021 Rating: 5

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